क्यों इस साल भारत में मॉनसून की बारिशें बनीं जानलेवा?

भारत में इस साल मॉनसून बारिशें केवल राहत ही नहीं बल्कि तबाही भी लेकर आई हैं। देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा ने बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी आपदाओं को जन्म दिया, जिससे सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों परिवार प्रभावित हुए। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह बारिश इतनी घातक क्यों साबित हो रही है और किन राज्यों में सबसे ज़्यादा असर दिख रहा है।

भारी बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य

  1. उत्तराखंड
    • पहाड़ी इलाकों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया।
    • चारधाम यात्रा मार्ग कई बार बंद करना पड़ा।
    • ग्रामीण इलाकों में घर बह गए और कई पुल टूट गए।
  2. उत्तर प्रदेश
    • पूर्वी यूपी और तराई क्षेत्र में नदियां उफान पर हैं।
    • गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और बलिया जिलों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित।
    • लाखों लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया।
  3. बिहार
    • कोसी और गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
    • गांवों में पानी भरने से खेत बर्बाद और आवागमन ठप।
    • राहत शिविरों में हजारों परिवार ठहरे हुए हैं।
  4. मध्य प्रदेश और राजस्थान
    • कई जिलों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश।
    • बांधों और नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
    • खेतों में फसल डूब गई, किसानों को भारी नुकसान।
  5. दिल्ली और एनसीआर
    • यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी।
    • राजधानी में सड़कें तालाब में तब्दील हुईं।
    • यातायात और बिजली व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा।

बारिश के जानलेवा बनने के प्रमुख कारण

  • अत्यधिक वर्षा (Extreme Rainfall Events):
    सामान्य से कई गुना अधिक वर्षा, जिससे नदियां और नाले संभाल नहीं पाए।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change):
    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग से मानसून पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है।
  • भूस्खलन और बादल फटना:
    खासकर पहाड़ी राज्यों में यह खतरा कई गुना बढ़ गया है।
  • अवैध निर्माण और शहरीकरण:
    नदियों के किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में निर्माण से जल निकासी बाधित हो गई है।
  • कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर:
    पुराने पुल, सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम इस बार की बारिश को झेल नहीं पाए।

नुकसान का अनुमान

  • सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों घायल।
  • लाखों लोग बेघर हुए।
  • कृषि और उद्योग में हज़ारों करोड़ का नुकसान।
  • स्कूल, अस्पताल और सरकारी इमारतें पानी में डूबीं।

सरकार और प्रशासन की तैयारी

  • एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत-बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
  • हेलीकॉप्टरों से लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है।
  • कई राज्यों में आपातकालीन अलर्ट जारी।
  • राहत शिविरों में भोजन, दवाइयां और आश्रय की व्यवस्था।

निष्कर्ष

इस साल की मॉनसून बारिशों ने साफ कर दिया है कि भारत को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत रणनीति और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। वरना हर साल बारिश राहत से ज्यादा आफत बनकर आती रहेगी।

मॉनसून बारिश के फायदे और नुकसान

फायदे

  1. कृषि को सहारा
    मॉनसून की बारिश भारत की खेती की रीढ़ है। धान, मक्का और दलहन जैसी फसलें सीधे इस पर निर्भर हैं। अच्छी बारिश से किसानों को भरपूर पैदावार मिल सकती है।
  2. जल भंडारण में सुधार
    बारिश से बांध, तालाब और झीलें भरती हैं, जिससे पूरे साल पेयजल और सिंचाई की सुविधा बनी रहती है।
  3. भूजल स्तर में वृद्धि
    लगातार वर्षा से जमीन के अंदर पानी का स्तर बढ़ता है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है।
  4. बिजली उत्पादन
    हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के लिए पर्याप्त पानी मिलना आसान हो जाता है।

नुकसान

  1. जनहानि और संपत्ति का नुकसान
    बाढ़, भूस्खलन और इमारतों के गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है।
  2. फसलों की बर्बादी
    जहां अधिक पानी की जरूरत नहीं, वहां खड़ी फसलें डूबकर नष्ट हो जाती हैं।
  3. स्वास्थ्य संबंधी खतरे
    जलजनित बीमारियां (डेंगू, मलेरिया, हैजा) तेजी से फैल रही हैं।
  4. यातायात और व्यापार पर असर
    सड़कें और रेल मार्ग ठप होने से सप्लाई चेन टूट जाती है, महंगाई बढ़ जाती है।
  5. इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान
    पुल, सड़कें और बिजली के खंभे टूटने से करोड़ों का नुकसान होता है।

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